अहमद सलमान: जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे काव्य डेस्क
आकर मुझे तोड़ जाएगा बिखराकर मेरे ख्वाबों को
पलकों में बसाकर तुझसे ख्वाब बुनते हैं,तेरे बिना हर लम्हा अधूरा सा लगता है। ❤️
छोटी-छोटी बातों में तेरा ख्याल आना,ये इश्क़ नहीं तो फिर क्या है दीवानापन? ❤️
तुझसे बिछड़कर भी तुझे चाहा हमने,ये इश्क़ नहीं, खुद से बेवफ़ाई थी शायद।
आपकी आँखों में सजे है जो भी सपने,और दिल में छुपी है जो भी अभिलाषाएं!
मनोहर नेत्रों से दो बूंद नीर उसपर गिराकर
हुस्न वाले जब ♀️तोड़ते हैं दिल किसी का# !#बड़ी मासूमियत से कहते हैं# मजबूर थे हम
वो करो जो दिल कहे, जिंदगी आपकी है किसी के बाप की नही।
जिसे देख कर लोग जलें,हम वही स्टाइल हर रोज़ पहनते हैं। ️
हम जैसे सिरफिरे ही इतिहास रचते हैं समझदार तो केवल इतिहास पढ़ते हैं।
अब तो आंसू भी कहने लगे हैं,”तू Trending Shayari रोता है बहुत, अब हम भी थक गए हैं।”
भवानीप्रसाद मिश्र: मैं जो हूँ मुझे वही रहना चाहिए काव्य डेस्क
खामोशी में भी दम होता है,और हमारी खामोशी तो कईयों की जलन बन चुकी है।